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The Faithbook Blog


जैनत्व वेदना… जैनत्व संवेदना… Part 4
जहाँ-जहाँ पर विहार करके गया और जिन-जिन संघों में प्रवचन किया, वहाँ पर मैंने जब-जब एक प्रश्न सभा से पूछा, कि, अपने जैन धर्म का मुख्य सिद्धांत कौनसा है? क्या है? तब - तब मुझे अक्सर एक जवाब प्रायः सुनने में आया, ‘अहिंसा परमो धर्म:!' या फिर दूसरा जवाब ये सुनने में आया कि, ‘जीओ और जीने दो।' मुझे आश्चर्य इस बात का था कि, कई सालों से प्रवचन सुनने वालों में भी अज्ञानता किस हद तक छायी हुई है। रटा-रटाया उधार उत्तर देकर वे लोग अपने आप ही किस प्रकार संतुष्टि की साँस ले रहे थे, वो मैंने अ

Panyas Shri Nirmohsundar Vijayji Maharaj Saheb
Sep 28 min read


प्रायश्चित्त की व्यवस्था
परमात्मा के शासन की एक कम प्रसिद्ध लेकिन अद्भुत विशेषता है प्रायश्चित्त की व्यवस्था। पापों के प्रायश्चित्त को बताने वाले विशेष (Special) ग्रंथ जिनशासन में उपलब्ध हैं, जो हज़ारों श्लोकों के प्रमाण में हैं। उनमें वर्णित कुछ खास विशेषताओं को संक्षेप में देखते हैं ➡ पाप करने के कारण के आधार पर प्रायश्चित्त का भेद पाप किन कारणों से होता है – यह जिनशासन में विस्तृत रूप से बताया है। मुख्यतः पाँच कारण बताए गए हैं अनाभोग (अज्ञान), सहसात्कार (अचानक हो जाना), प्रमाद (आलस्य, सुखप्रियता आ

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Aug 62 min read


अविरति से पापबंध
जिनशासन की एक अनुपम विशेषता है वह केवल पाप-प्रवृत्ति को ही नहीं, बल्कि पाप की अविरति को भी पाप मानता है, कर्मबंध का कारण मानता है। इस बात को विस्तार से समझते हैं। मान लो कि आप आज तक विदेश नहीं गए हो, और भविष्य में जाने की कोई योजना अभी नहीं है। मैं आपसे कहूं – “जीवन में कभी विदेश न जाना” ऐसी प्रतिज्ञा ले लो। क्या आप यह प्रतिज्ञा लोगे ? अधिकतर लोगों का उत्तर होगा – "नहीं"। क्यों ? यदि विदेश जाने की अभी कोई योजना है ही नहीं, तो भी प्रतिज्ञा लेने की तैयारी क्यों नहीं होती ? क्य

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Jul 82 min read


जैनत्व वेदना… जैनत्व संवेदना… Part 3
अभी कुछ महिनों से युद्धविभिषिका समस्त विश्व को डरा रही है। मीडिया और मन दोनों युद्ध के समाचारों से भरे जा रहे हैं, डरे जा रहे है। हम उन दिनों में अंतरिक्षजी तीर्थ में थे, जब इरान-अमरिक के युद्ध को एक महीना भी पूरा नहीं हुआ था। एक डॉक्टर मेरी सलाह लेने के लिए अंतरिक्षजी आये थे, मैंने बात-बात में उन्हें कहा था कि अब तैयारी कर लो, वर्क फ्रोम होम के दिन वापिस आनेवाले है। मार्च - 21 को कहीं बात को एक महिना मुश्किल से हुआ होगा, और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई ने भी अपने उद्

Panyas Shri Nirmohsundar Vijayji Maharaj Saheb
Jul 26 min read


नये धर्मस्थान या विद्यामंदिर (जैन स्कूल)? वर्तमान युग में अधिक आवश्यक क्या है?
धर्मस्थान — पुण्य की वृद्धि कराता है, शुभभावों की वृद्धि कराता है, साधना में प्रगति कराता है। और जैन स्कूल — गलत आदतों, कुसंस्कारों और कुसंग से बचाता है, सात व्यसनों और कृतघ्नता जैसे बड़े पापों से बचाता है। धर्मस्थान : आत्मा के विकास का केंद्र है। जैन स्कूल : आत्मा की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। “Development” और “Defense” — इन दोनों में प्राथमिकता सदैव “Defense” की ही होती है। आने वाले निकट भविष्य में अनेकों नये धर्मस्थान तो विद्यमान होंगे,लेकिन वहाँ जाने वाले जैन ही नहीं बचे

Muni Shri Tripadiratna Vijayji Maharaj Saheb
Jun 102 min read


उत्सर्ग-अपवाद
जिनशासन की अप्रतिम विशेषताओं में से एक है - जिनशासन में मार्ग के दो प्रकार बताए गए हैं – उत्सर्ग और अपवाद। कोई विशेष कारण न हो, तब जिसका आचरण करना है, उसे उत्सर्ग कहते हैं। विशेष कारण आने पर जिसका आचरण करना है, उसे अपवाद कहते हैं। उदाहरणों से यह विषय स्पष्ट होगा। साधु-साध्वी भगवंतों के आचरण में उत्सर्ग-अपवाद को समझते हैं - 1.रोज एकासणा करना – एक ही बार गोचरी वापरना, वह उत्सर्ग है। बीमारी हो, वृद्धावस्था हो, विहार-प्रवचन-पठन आदि का कठोर परिश्रम हो, तपस्या का पारणा हो, शरीर कोम

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Jun 36 min read


जैनत्व वेदना… जैनत्व संवेदना… Part 2
गत प्रकरण में तेलंगाना राज्य में जिज्ञासु एवं भावुक लोगों के द्वारा पूछे गये प्रश्नों की सूचि जारी की थी, अब इस प्रकरण में कुछ अच्छे अनुभव आप से शेयर करना चाहता हूँ। गत प्रकरण में बताया था कि, तेलंगाना राज्य से जब विहार चल रहा था हमारे साथ रहे हुए महात्मा, विहार में स्थान पर पहुँचने में कभी-कभी देर कर देते थे, और जब उसका कारण पता चलता था तो आनंद होता था कि, चलो, अच्छे काम के कारण देरी हो तो अच्छी बात है। अच्छे काम में देरी नहीं होनी चाहिए, लेकिन अच्छे काम के कारण देरी यदि होत

Panyas Shri Nirmohsundar Vijayji Maharaj Saheb
May 278 min read


खूब चली गोली... खूब चली लाठियां, फिर भी अडिग रहे बागमाल बांठिया
'आर्यावर्त की अखंडता, शासन की सर्वोपरिता’ महावीर के वंशजों की ये शपथ है, ये वीरों का पथ है। इस आर्यावर्त को परतंत्रता की जंजीरों से जकड़ने के लिए अंग्रेजों ने जब अपनी कपटवृत्ति का सहारा लिया तब इस देश के वीर सपूतों ने जेल की जंजीरों से, फांसी के फंदे से और गोलियों की बौछार से डरे बिना, डगमगाये बिना स्वतंत्रता के नए इतिहास को अंजाम देने लड़ते रहे… आगे बढ़ते रहे। 6 अक्टूबर 1924 को कोटा के एक प्रतिष्ठित जैन परिवार में आपका जन्म हुआ। आपके ताऊ कस्तूरमल बांठिया का समाज में सन्मानन

Muni Shri Parshwasundar Vijayji Maharaj Saheb
May 202 min read


निश्चय-व्यवहार
जिनशासन की एक अनुपम विशेषता है – धर्म (या गुण) के निश्चय और व्यवहार, ऐसे दो प्रकार बताए गए हैं। आत्मा में प्रकट होने वाला गुण (या नाश होने वाला दोष) – वह निश्चय है। उसे प्रकट करने के लिए आवश्यक ऐसी बाहरी क्रिया, या यदि गुण प्रकट ही हो, तो उससे स्वाभाविक रूप से बाहर होती हुई क्रिया – वह व्यवहार है। दृष्टांतों से यह विषय स्पष्ट होगा। व्यवहार नय ऐसा कहेगा कि जो साधु का वेश पहनता है, जिसमें साधु के आचारों का पालन दिखता है, वह साधु है। निश्चय नय ऐसा कहेगा कि जिसमें महाव्रतों के पा

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
May 136 min read


जैनत्व वेदना… जैनत्व संवेदना… Part 1
चेन्नई से मुम्बई की ओर विहार चल रहा है। बीच में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना होते हुए महाराष्ट्र में आ चुके है। आंध्रप्रदेश के हर गाँव के बाहर चर्चो को देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ। जानकारी लेने पर पता चला की, पूर्व मुख्यमंत्री जगन रेड्डी क्रीश्चन धर्म में कन्वर्ट हुआ और फिर पूरे आंध्र का कन्वर्जन करने में उसने पूरा सहयोग दिया। मुंबई के बाहरी इलाकों में एक गाँव है, जहाँ पर अपनी एक जैन संस्था ने अनाथ बच्चों का आश्रम बनाने के लिए जब जगह लेने की कोशिश की, तो एक काला सच सामने आया। आज भारत म

Panyas Shri Nirmohsundar Vijayji Maharaj Saheb
Apr 226 min read


योग्यता के भेद से धर्म का भेद…
जिनशासन की एक अनुपम विशेषता है जीव की योग्यता के अनुसार उसके लिए धर्म बदलता है। करपात्री लब्धि वाले साधु पात्र नहीं रखतें और हाथ में गोचरी वापरते हैं – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि पात्र रखने से संभावित मूर्छा आदि दोषों से बचाव होता है, और लब्धि होने के कारण हाथ से आहार गिरता नहीं।) ऐसी लब्धि न हो, तो साधु पात्र रखते हैं – वह उसके लिए धर्म है। (क्योंकि अगर पात्र न रखे, तो हाथ से आहार गिर सकता है, लोकनिंदा होती है... और भी कई दोष हैं।) जिन्होंने पर्याप्त शास्त्र-अध्ययन कर लिय

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Apr 152 min read


अभी भी सोना है? तो बाद में रोना है...
यहाँ पर कुछ घटनाएँ एवं उन घटनाओं के घटित होने का समय बताया जा रहा है। इन घटनाओं का निष्कर्ष एवं भविष्य की संभावनाएँ भी साथ में प्रकाशित कर रहे हैं। 1. दिसंबर 2024: छत्तीसगढ़- रायपुर, लाभांडी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में से चोर लोग, भगवान की मूर्ति छोड़कर बहुत सारा कीमती सामान चुराकर ले गए - गहने, भंडार (दानपेटी) इत्यादि। 2. अगस्त 2025 राजस्थान- अलवर, जैन मंदिर में से चाँदी के छत्र, अन्य कीमती सामान तथा लाखों रुपयों की संपदा चोर चुराकर ले गए। ये वही मंदिर है जहाँ से पहले भी अ

Panyas Shri Nirmohsundar Vijayji Maharaj Saheb
Mar 1912 min read


अति सूक्ष्म आचार-निरूपण
प्रभु के शासन में आचारों का जो अति-सूक्ष्म निरूपण है, वह रोमांच खड़ा कर देने वाला है। साधु भगवंत को विहार करना होता है, उसकी विधि शास्त्र में बताई गई है। उसमें कितना सूक्ष्मताभरा निरूपण है ! देखिए एक रास्ता पत्थरोंवाला हो, दूसरा रास्ता धूलवाला हो... तो किस रास्ते पर जाना चाहिए ? एक रास्ते पर पानी हो, दूसरे रास्ते पर घास हो... तो किस रास्ते पर जाना चाहिए ? ऐसे ढेर सारे विकल्प दिखाकर, उनमें से किस रास्ते पर जाना चाहिए – वह बताया गया है। विहार कब (किस समय) करना चाहिए ? कौनसे संय

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Mar 122 min read


धार्मिक प्रसंगों में आडंबर पर Control क्यों नहीं ?
प्रश्न: जब विवाह जैसे सांसारिक प्रसंगों को सादगी से मनाने की प्रेरणा दी जाती है, तो फिर धर्मगुरु धार्मिक प्रसंगों में होने वाले इतने अधिक खर्च और आडंबर पर Control क्यों नहीं रखते? उत्तर: खर्च और आडंबर मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं — 1. व्यक्ति-केन्द्रित 2. भक्ति-केन्द्रित व्यक्तिगत प्रशंसा, किसी साधु-साध्वी या गृहस्थ की वाह-वाह के लिए किया गया खर्च धर्मसम्मत नहीं माना जाता। ऐसी दिखावटी प्रवृत्ति को परमात्मा का शासन कभी स्वीकार नहीं करता। लेकिन जो खर्च या आयोजन जैन-अजैन भ

Muni Shri Tripadiratna Vijayji Maharaj Saheb
Feb 183 min read


भविष्य का बालक? बालक का भविष्य ? भाग-4
इस एपिसोड में कुछ गंभीर एवं खतरनाक जानकारी पाठकों के साथ सरल शब्दों में शेयर करने की इच्छा है। कभी-कभी आप को सजग करने के लिए रिसर्च के आधार पर भविष्य की जो-जो बातें सुनाई जाती हैं, वह हमेशा सत्य ही हो ऐसा भी नहीं है, लेकिन मेरा कार्य किसी के खौफनाक प्लान को उजागर करना है। कई सारी भविष्य की बातें सही भी निकली हैं, जैसे कि कोविड-वैक्सीन, सोना-चाँदी के बढ़ते दाम, पानी से इस साल आयी आपदाएं… कुछ भविष्यवाणियां अभी सही होती हुई नहीं दिख रही, तो उसमें समय आगे-पीछे हो सकता है, जैसे कि

Panyas Shri Nirmohsundar Vijayji Maharaj Saheb
Feb 1313 min read


मार्गदर्शक गुरु
जिनशासन का गुरुतत्त्व तो अनुपम है ही, साथ ही इसकी एक अद्भुत विशेषता यह भी है कि आत्महित का मार्गदर्शन के लिए जिस गुरु से लेना है, उन्हें सामान्य गुरु से भिन्न करता है। जो साधु आचारों से सम्पन्न हो, वह वंदनीय है, पूजनीय है — इसमें कोई संदेह नहीं। लेकिन आत्महित के मार्गदर्शन के लिए केवल आचारसंपन्नता पर्याप्त नहीं है। दृष्टांत से यह बात समझ में आएगी। यदि कार चलाने के लिए ड्राइवर चाहिए, तो वह सज्जन हो – यह तो ज़रूरी है ही — उस पर विश्वास किया जा सके, चोरी न करे, नशा न करे — यह

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Feb 42 min read


भविष्य का बालक? बालक का भविष्य? Part - 3
सन्-2024, U.P. में 5 साल की कामीनी की मौत हार्ट अटैक से आयी। उसी प्रकार सन्-2020 में इजिप्त में 12 साल की आयु के लड़के की मौत भी पब-जी खेलते हुए हार्ट फेल्योर से हुई। ऐसे अनेक बच्चों की डेथ के पीछे के कारणों की खोज करने पर पता चला कि वे बच्चे मोबाइल एडिक्ट हुए थे और भयावह स्ट्रेस-डिप्रेशन का सामना कर रहे थे। कार्टून बनाने वाली कंपनियाँ, सीधा ही कोई कार्टून लॉन्च नहीं कर देती है। वे लोग अपने बनाये हुए कार्टून को देखने के लिए अलग-अलग बच्चों को बिठाते है। दिखाते है, इतना कहना

Panyas Shri Nirmohsundar Vijayji Maharaj Saheb
Jan 199 min read


गुरुतत्व
जैसे जिनशासन के परमात्मा अद्वितीय हैं, वैसे ही जिनशासन में गुरुतत्त्व भी अनुपम है। अन्य सभी दर्शनों के संन्यास की तुलना में, जिनशासन का संयम विशिष्ट है, दोषों के नाश के लिए सक्षम है। यदि उसका पूरा वर्णन करना हो, तो एक ग्रंथ लिखना पड़ेगा। आइए, कुछ अत्यंत अलग दिखाई देने वाली विशेषताओं को देखें... विहार जैन साधु का कोई भी स्थायी स्थान – मकान, आश्रम, मठ, घर नहीं होता। वे सदैव चलते रहते हैं। इससे स्थान के ममत्व और स्थान से जुड़ी व्यक्तियों के प्रति ममत्व, और उनसे उत्पन्न होने वाले

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Jan 72 min read


परमात्मा की सर्वज्ञता
जो आत्मा या परलोक का स्वीकार ही नहीं करता, ऐसे विज्ञान के मापदंडों से आत्मा के अस्तित्व पर आधारित धर्म की जांच करना — यह समुद्र को फुटपट्टी से नापने जैसी व्यर्थ चेष्टा है। फिर भी, आज जो बातें वैज्ञानिक संशोधनों से सिद्ध हो रही हैं, वे सैकड़ों वर्ष पूर्व बिना किसी प्रयोग के जिनशासन में बताई गई थीं — यह सत्य हमें चकित कर देनेवाला है। इसलिए, ऐसी कई बाते देखतें हैं। 1. ध्वनि(Sound) की द्रव्य(पुद्गल) रूपता अन्य दर्शनों में ध्वनि को आकाश नामक द्रव्य का गुण माना गया है। जिनशासन न

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Dec 16, 20252 min read


भविष्य का बालक? बालक का भविष्य? Part - 2
गत एपिसोड में स्कूल की कुछ कमजोर बाजू दिखाई गई थी। इस एपिसोड में स्कूल में पढने वाले, नहीं पढने वाले छोटे और थोड़े बड़े बच्चों पर भी किस प्रकार के आक्रमण हो रहे है, उस की बात करनी है। सन् 2010 से 2025 तक जन्में हुए बच्चों को Gen. Alpha कहा जाता है। अभी-अभी नेपाल में क्रांति करने वाली युवा पीढी को Gen-Z कहा जाता है, जो सन् - 2010 से पहले पैदा हुई है। इस Gen - Alpha को यानी 10 से 15 साल की उम्र तक के बच्चों को आज की भाषा में आइ-पेड बेबी भी कहा जाता है। उन का पसंदीदा खिलौना

Panyas Shri Nirmohsundar Vijayji Maharaj Saheb
Dec 4, 20257 min read
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