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भविष्य का बालक? बालक का भविष्य ? भाग-4

  • Feb 13
  • 13 min read


इस एपिसोड में कुछ गंभीर एवं खतरनाक जानकारी पाठकों के साथ सरल शब्दों में शेयर करने की इच्छा है।


कभी-कभी आप को सजग करने के लिए रिसर्च के आधार पर भविष्य की जो-जो बातें सुनाई जाती हैं, वह हमेशा सत्य ही हो ऐसा भी नहीं है, लेकिन मेरा कार्य किसी के खौफनाक प्लान को उजागर करना है। कई सारी भविष्य की बातें सही भी निकली हैं, जैसे कि कोविड-वैक्सीन, सोना-चाँदी के बढ़ते दाम, पानी से इस साल आयी आपदाएं…


कुछ भविष्यवाणियां अभी सही होती हुई नहीं दिख रही, तो उसमें समय आगे-पीछे हो सकता है, जैसे कि कोविड जैसी महामारी - 2025 के अंत में आने की संभावना हमने अभिव्यक्त की थी, वह हो सकता है सन् 2026 में आए या फिर बिल्कुल भी न आए।


शेयर बाजार ध्वस्त होने का आकलन 2025 के अंत में होने की जो बात थी, वह भी शायद हो सकता है सन् 2026, फरवरी में हो या मार्च में....


जिस प्रकार सोना-चाँदी में बड़ी उथल-पुथल चल रही है, वह आने वाले भविष्य की ही घोषणा है। आने वाला काल बड़ा विकट है, ऐसा बड़े-बड़े व्यापारी भी मान चुके हैं। आर्थिक महासंकट पूरे विश्व के सिर पर मंडरा रहा है, ऐसा अधिकांश लोग बोल रहे हैं। प्रश्न सिर्फ कुछ दिनों का या महीनों का है, ऐसा लग रहा है।


ठीक इसी प्रकार अब यहाँ पर बच्चों के भविष्य के बारे में एक खौफनाक रिसर्च प्रस्तुत करना चाहूँगा।

यहाँ पर सिर्फ प्लानिंग की बात है और प्लानिंग (आयोजन) निष्फल भी जा सकता है, इतने मात्र से यहाँ लिखे गए रिसर्च में छिपे तथ्यों को कोई मजाक में लेने की गलती भी न करें।


हो सकता है कि यहाँ पर लिखी गई बातों को कुछ पाठक हजम न कर पाएँ, लेकिन जो बवंडर आने की संभावना बन चुकी है, उसका जिक्र किये बिना मैं नहीं रह सकता हूँ क्योंकि मेरा यही कर्त्तव्य है।


आपकी जागृति और सावधानी के साथ सामूहिक रूप से किये गए प्रयासों से शायद वह बवंडर दूसरी दिशा में चला जायेगा, तो मैं अपना श्रम सार्थक मानूँगा। इतनी भूमिका करने के बाद...


अब इस लेख के बारे में कुछ स्पष्टता कर लेना चाहूँगा।


कुछ सालों से (खास तौर पर कोविड-2019 के कालखंड के बाद) आपने देखा होगा, युवा और बच्चे धर्मक्षेत्र से दूर होने लगे हैं। उपाश्रय या मंदिर में जाना पहले से कम हो रहा है, इसका कारण क्या हो सकता है? मैं सोच रहा था।


चैन्नई चातुर्मास के दौरान किसी के साथ हुई बातचीत में पता चला कि वह सेक्स एजुकेशन के समर्थन में थे। मेरे पास हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषा में छपी 'Red Alert' बुक थी, मैंने उन्हें पढ़ने के लिए दे दी, जो समर्थक थे वे पढ़ने के पश्चात समझ गए और सेक्स एजुकेशन के विरोध में आ गए।


सन् 2007 के दिल्ली चातुर्मास में मेरे गुरुदेव श्री समेत अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं विद्वानों के प्रयासों से यौन शिक्षा रोकने में अत्यधिक सफलता मिली थी। खास तौर पर भाजपा शासित राज्यों में (गुजरात आदि में) उस वक्त संपूर्ण रूप से प्रतिबंधित हुआ था। 'Red Alert' की बुक सन् 2007 में 'जटायु' लेखक के नाम से प्रकाशित हुई थी। गुजराती, हिंदी, अंग्रेजी एवं उर्दू इस प्रकार चार भाषाओं में प्रकाशित इस किताब की एक लाख से अधिक प्रतियाँ विभिन्न भारतीय राज्यों में वितरित की गई थी, जिसके कारण भारत राष्ट्र पर आ रहा एक बवंडर टल गया या कहो बड़ा नुकसान नहीं कर पाया।


सन् 2007 में जिस विषय पर पूरे देश में एक बहस छिड़ गई थी, वह यौन शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय को आज मैं क्यों याद कर रहा हूँ? (2026 में)

कारण नं. 1: भारत की सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की दो जजों की बेंच (संजय कुमार और एस. सी. शर्मा) ने भारत सरकार को अक्टूबर में निर्देश दिया कि, CSE छोटी उम्र से शुरू किया जाये और पूरे भारत की सभी स्कूलों में इसे अनिवार्य किया जाये। अब यह CSE कौन सी बला का नाम है? अगर आपके मन में ऐसी जिज्ञासा है, तो मान लो यौन शिक्षा का ही बदला हुआ नाम है।


C=Comprehensive

S=Sexuality

E=Education


कारण नं. 2 : कुछ महिने पहले रिलीज हुई मूवी 'OMG-2' को देखने वाले कुछ अनभिज्ञ (अन्जान) सज्जन भी अब सेक्स एजुकेशन का समर्थन कर रहे हैं क्योंकि OMG-2 में कुतर्कों के माध्यम से यौन शिक्षा का इस प्रकार समर्थन किया है, कि देखने वाले का Brainwash हो जाये, और वे सब यौन शिक्षा के समर्थन में आ जाये।


सन् 2007 में विरोध होने के बावजूद भी वैश्विक संस्थाओं में बैठे कुछ शैतानी दिमाग के लोगों के लगातार प्रयास इस दिशा में (यौन शिक्षा लागू करने की दिशा में) जारी रहे हैं, उसी का नतीजा आज यह है कि अब पूरा का पूरा तख्ता बन चुका है। यौन शिक्षा के विरोध के बाद भी NACO (National Aids Control Organisation) और UNICEF ने साथ मिलकर AEP चलाया था। AEP यानी Adolescent Education Programme... सन् 2009 में दोनों अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने मिलकर 'Life Skills' के नाम से 'sex edu.' को डिजाइन कर के 5000 से अधिक गवर्नमेंट एवं प्राइवेट स्कूलों को कवर किया। 2009 से शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट सन्-2020 तक चालू रहा था, फिर आज तक इस नाम को बदलकर, लेकिन काम जारी रहा है।


2020 के बाद Modern Education Policy बनायी गयी और आयुष्मान भारत के माध्यम से School Health and Wellness Programme (SHWP) नाम से केन्द्र सरकार ने इसे जारी रखा। कुछ राज्यों में अत्यंत सीमित मात्रा में ही इसे कक्षा 9 से कक्षा 12 तक ही पढ़ाया जाने लगा, विशेष रूप से उन राज्यों में सीमित मात्रा में पढ़ाया गया जहाँ यह प्रतिबंधित हो चुका था। कुछ स्थानों में तो टीचर्स ही स्वयं इसे पढ़ाना नहीं चाहते हैं, इसीलिए लीपापोती करके छोड़ दिया जाता है।


CBSE ने अपनी सभी स्कूलों में AEP (एक प्रकार का सेक्स एजुकेशन) Std 9 to 12 में पढ़ाना अनिवार्य किया हुआ है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति ने सन्-2017 में Adolescent and Sexual Health Education को मान्यता प्रदान की और सभी स्कूलों में पढ़ाने की बात तत्कालीन केन्द्र सरकार को की, जिससे केन्द्रीय मंत्री ने 'Gender Edu.' के नाम से sex edu. देने की तैयारी शुरू कर दी।


[RKSK-Rashtriya Kishor Swasthya Karyakram] RKSK एक सरकारी कार्यक्रम है, जो 10 साल से 19 साल की आयु के किशोर- किशोरियों के लिए पोषण, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, हिंसा, नशा के ऊपर काम करता है, जिसमें जानकारी एवं सेवा देना दोनों शामिल है। सन् 2018 से RKSK जारी हुआ, फिर NCERT (जो भारत के छात्रों के लिए अध्ययन उपयोगी सिलेबस तैयार करने का काम करता है)


NCERT ने Curriculum (on Health and Wellness of school going Adolescents and Guidelines on CSE) / An Introduction for School Teachers जैसी किताबें बनाईं, जिसके माध्यम से टीचर अपनी क्लास में छात्र-छात्राओं से इस बारे में चर्चा कर सकें। यानी यह Subject ही ऐसा है कि जिसमें टीचर एवं छात्र दोनों नये हैं, दोनों को तैयार किया जाता है।


सभी राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में कक्षा 6 से 12 तक CSE चलाने का प्रावधान (केन्द्र सरकार का निर्देश) होने पर भी सभी राज्यों में एकसमान तरीके से चलाया नहीं जा रहा है, कई जगह बहुत गहराई में तो कई जगह ऊपरी-ऊपरी स्तर पर सिखाया जा रहा है, जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट नाराज़ है। कई जगह कक्षा-9 से तो कई जगह कक्षा 6 से सिखा रहे हैं, लेकिन झारखण्ड जैसे राज्य में शुरू से (सन्-2006 से सन्-2016 तक) सभी प्राथमिक एवं सेकेंडरी स्कूलों में काफी हद तक CSE (Sexuality Edu.) को पाठ्यक्रम में जोड़ दिया गया था। यानी वहाँ पर कक्षा-1 से ही उम्र के हिसाब से इस विषय की पढ़ाई शुरू कर दी गई थी।

बड़े बच्चों को तो बहुत अधिक विस्तार से यौन शिक्षा आधारित कंटेंट था।


सन् 2009 से कर्नाटक जैसे राज्यों में भाजपा शासित सरकार ने जिस यौन शिक्षा को प्रतिबंधित कर रखा था, वह शिक्षा को पढ़ाने की घोषणा सन्-2025 में वर्तमान कांग्रेस सरकार ने की हुई है, जो कि बेहद चिंताजनक है। केरल हाई कोर्ट ने केरल सरकार को सूचित किया है कि, कक्षा 6 से यौन शिक्षा शुरू की जाये।


Population Foundation of India की एक परियोजना के तहत, U.P., झारखण्ड, मणिपुर और दिल्ली जैसे राज्यों में, विभिन्न सरकारी विभागों के साथ मिलकर CSE को सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम तथा किशोरी स्वास्थ्य के साथ जोड़ दिया गया है। फिलहाल U.P. के चुनिंदा जिलों में तकरीबन 6 से 12 की कक्षा तक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया जा रहा है।


CSE के Project में विकसित एवं विकासशील शरीर, हार्मोनल चेन्जेस, युवा एवं किशोर अवस्था में शरीर में आ रहे बदलाव, प्रजनन तंत्र, HIV-AIDS से बचाव, यौन शोषण, यौन हिंसा से सुरक्षा, गुप्त रोगों से सुरक्षा, Bad touch and Good touch, Healthy Relationship जैसे 11 थीम्स पढ़ाये जाते हैं।


ये सारी बातें आज के जमाने में पढ़ानी अत्यंत आवश्यक है, ऐसा आज के अभिभावकों को लगता है, लेकिन ऊपर-ऊपर से अच्छी दिखनेवाली चीजों के अंदर क्या है, जब तक पता नहीं चलेगा तब तक कुछ भी अच्छा नहीं मान सकते हैं। यौन शिक्षा शुरू होने के बाद भविष्य में इन सब के क्या दुष्परिणाम आ सकते हैं, इसे परखने के लिए जहाँ पर ऑलरेडी ये दिया जा चुका है, ऐसे राष्ट्रों एवं राज्यों के परिणामों को देखना भी जरूरी है। यौन शिक्षा के अंदर की एवं भविष्य की बातें संक्षेप में समझाने के लिए ही यह लेख लिखा गया है। यहाँ पर सज्जनता एवं शिष्टता की मर्यादा में रहकर लिखना जरूरी भी है और एक चुनौती भी है।


उत्तर प्रदेश में सन्-2020 से सन्-2025 में कुछ सिलेक्टेड जिलों में, सिलेक्टेड स्कूलों में 6 से 12 कक्षा तक यौन शिक्षा पढ़ानी जारी थी, लेकिन वहाँ बनी कुछ खास घटनाओं ने समाज को झकझोर कर रख दिया जिसके चलते बंद करना पड़ा है, फिर भी सुप्रीम कोर्ट लागू करने के पीछे पड़ी है, हकीकत में सुप्रीम कोर्ट से भी ज्यादा कुछ NGO और Population Foundation of India जैसे गैर सरकारी विदेशी फंड संचालित संगठन इसे लागू करने के लिए उतारू हैं।


पाठकों से एक और जानकारी शेयर करना चाहूँगा।

December-2025 में HECI bill पास होने की बात है। यदि यह बिल कानून बन जाता है तो शिक्षा संस्थानों की स्वतंत्रता खत्म हो जायेगी, ऐसा कुछ लोगों का मानना है।


UGC - University Grants Commission

AICTE - All India Council for Technical Education

NCTE - National Council for Teacher Education


ये तीनों शिक्षा संस्थान इस (HECI) बिल के पास होने के बाद मूल्यहीन बन जायेंगे। बिल का कानून में परिवर्तित होने से स्कूल-कॉलेज-यूनिवर्सिटी इत्यादि सब डिजिटल होने का रास्ता क्लियर होगा और कई सारे विद्वानों के अभिप्राय से शिक्षा सिर्फ नाम की रहेगी और केन्द्रीकृत नियंत्रण में चली जाने की संभावना है। HECI बिल के कारण शिक्षा का वास्तविक स्वरूप नष्ट होगा और स्वायत्त संस्थाओं की स्वाधीनता का हनन होगा, ऐसा कुछ लोगों का मानना है।


अब करंट टॉपिक पर इसका क्या असर रहेगा वो भी सोच लेते हैं।

Agenda-2030 के मुताबिक :-


(जिन्हें Agenda-2030 का पता नहीं, उन्हें संक्षेप में... बता दूँ तो New World Order को ही Agenda-2030 समझना है।) विश्व की जो बड़ी-बड़ी संस्थाएं हैं, उन्हें कंट्रोल करने वाले Big Boss एक आयोजन (Plan) के तहत सन् 2030 तक सम्पूर्ण विश्व में एक प्रकार का सिलेबस सभी शिक्षा संस्थानों में लागू करना चाहते हैं। यौन शिक्षा अनिवार्य करने का उनका जो प्लान है, वह यदि सचमुच 2030 तक सफल हो जाता है तो भारत जैसे संस्कृति प्रेमी देशों में भूचाल आ जायेगा। UNO और WHO जैसी वैश्विक संस्थाएँ, कुछ लोगों के इशारे से, जो कुछ भी परोसना चाहते हैं उसकी PDF और proof यदि चाहिए तो 9166568636 पर संपर्क करके मंगवा सकते हैं (only whatsapp)।


यहाँ पर ऐसे सिलेबस की बात करनी मेरी मजबूरी है, और अंदर की हकीकत सार्वजनिक मंच पर प्रकाशित करनी, किसी सज्जन के लिए असंभव प्रायः है। जो बातें यहाँ लिखने में, बताने में भी शर्म महसूस हो, ऐसी बातें आपकी मासूम संतानें कैसे सीखेंगी? और यदि बेशर्म होकर उसे पढ़ने के लिए बोला जाये तो क्या आप उसे स्वीकार कर पायेंगे?


हरियाणा यमुनानगर की हाईप्रोफाइल स्कूल की 9वीं कक्षा की छात्राओं ने क्लासरूम में ही बीयर पीकर 12वीं की छात्राओं की जमकर पिटाई कर दी, ऐसे अनेक समाचार स्कूल की हवा में बदबू बनकर फैल रहे हैं, तब यौन शिक्षा सीखने के बाद क्या आप खुशबू फैलने की आशा कर रहे हो? तो आप बड़े भोले और नासमझ इंसान हो, क्योंकि जहाँ-जहाँ पर यौन शिक्षा शुरू हुई, वहाँ-वहाँ पर संस्कारों का, मर्यादा का, नियम, विवेक एवं लज्जा का सत्यानाश ही हुआ है, क्या आपको इस बात की जानकारी है?


मैं फिर से बता दूँ तो यह शिक्षा देने का रस सरकार से भी ज्यादा UNFPA जैसे विदेशी फंडिंग वाले गैर सरकारी संस्थानों को ही है। 2000 करोड़ जैसी बड़ी फंडिंग यौन शिक्षा लागू करने के लिए है, ऐसे समाचार भी हैं, और इसी कारण से, जहाँ-जहाँ पर यौन शिक्षा भारत की स्कूलों में शुरू हुई, वहाँ उत्पन्न हुए विरोध एवं विकृतियों के विशिष्ट समाचार मीडिया से गायब भी किये गये। हमारे पास हमारी टीम के माध्यम से जो थोड़े बहुत भी समाचार आये हैं, वो आपको हिलाकर रख देने के लिए काफी हैं।


इन समाचारों को पढ़ने के बाद जो समझदार माँ-बाप होंगे, वे अपनी संतानों को स्कूल में से उठा लेने का या दूसरा कोई रास्ता खोजने का ही निर्णय लेंगे। जहाँ CSE (यौन शिक्षा) शुरू हुआ, वहाँ क्या-क्या हुआ? सिर्फ एक राज्य से आये इन समाचारों को पढ़िए - बुलंदशहर, U.P. सन्-2025; कुछ स्कूलों में CSE शुरू किया। 11 साल की भोली भाली बेटी पर दुष्कर्म हुआ, जिसे सुनकर उस बेटी की माँ बेहोश हो गई, पिता ने स्कूल में आगजनी की। U.P. में 2025 तक ऐसे 17 किस्से बन चुके हैं और सारे के सारे किस्से CSE पढ़ाने वाली स्कूलों के हैं। CSE के कारण वहाँ पर कुछ बच्चे शिकार बन रहे हैं, तो कुछ बच्चे शिकारी।


कुछ स्कूलों में, CSE के सिलेबस के आधार पर 'Sex Games' जैसी बातें सिखाई जा रही हैं। यह शिक्षा नहीं, जहर का ही दूसरा स्वरूप है जो कि छोटे बच्चों के दिमाग में घोला जा रहा है। सही बात तो यह है कि, 'Bad touch' और 'Good touch' की समझ माता-पिता से बढ़कर कोई भी नहीं दे सकता, लेकिन ये सब सिखाने के चक्कर में बहुत कुछ bad-bad भी सिखा दिया जाता है। वे बच्चे छोटी उम्र में ही एक अलग किस्म के कीचड़ में घसीट लिये जाते हैं और छोटी उम्र में ही वो बड़े बन रहे हैं। बारह साल के बच्चे को थ्योरिकल (theoretical) सिखाने के बाद यदि कौतुक से प्रैक्टिकल कर लेगा तो?


U.P. कानपुर-2022 Class-7th में पढ़ रही बेटी पर स्कूल परिसर में ही गैंगरेप हुआ। U.P. में पिछले 5 सालों में CSE पढ़ाने वाली स्कूलों में ही ऐसे हादसे 89 के जितने हुए हैं।


NCRB का डाटा बताता है कि सन्-2020 से 2022 तक बच्चों के यौन शोषण के केस 96% बढ़े हैं, जिसमें से 60% केसिस तो उन स्कूलों से जुड़े हुए हैं, जहाँ पर CSE गुप्त रूप से या खुलेआम पढ़ाया जाने लगा है। CSE यौन शोषण रोकने या कम करने का काम नहीं करता है, बढ़ाने का ही काम करता है क्योंकि CSE मॉडल पश्चिमी संस्कृति की देन है, अपनी मर्यादा भरी संस्कृति से उसे कोई लेना-देना नहीं है।


U.P. गोरखपुर-2021, एक बेटा घर पर आकर बोला- "मैं गे (Gay) हूँ, क्योंकि स्कूल में मुझे ऐसा सिखाया गया है।" यह सुनकर पिता ने चाकू उठाया, पहले अपने बेटे का गला काटा और फिर स्वयं का। यह दुर्घटना देखकर माँ ने भी ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली। U.P. में 2020 से लेकर 2025 तक... ऐसे 312 परिवार बर्बाद हो चुके हैं। वजह? CSE...


घर-घर होली जलाने का काम CSE के कुछ टॉपिक्स कर सकते हैं, क्योंकि CSE में 'Gender Identity' और 'Sexual orientation' इत्यादि जैसे टॉपिक्स इतनी बारीकी और गहराई से बताये गये हैं कि छोटे बच्चे कन्फ्यूज हो जाते हैं। वह अपनी पुरुष या स्त्री के रूप में पहचान तक भूल जाते हैं। अध्ययन करने पर पता चला है कि CSE से CSA (Child Sexual Abuse) बढ़ता है और CSA से जुड़ी हुई घटनाओं में सुसाइड रेट 13 गुना बढ़ जाती है।


सुसाइड, मर्डर, रेप, लव मैरिज, डाइवोर्स, लिव-इन, अबॉर्शन, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर और प्री-मैरिटल अफेयर्स की बाढ़ आ जायेगी यदि इसी प्रकार सभी राज्यों में ओरिजनल यौन शिक्षा देनी शुरू हो जायेगी।


Agra-U.P. 2023, में एक स्कूल की एक टीचर ने CSE के क्लास में वल्गर (गंदा-भद्दा) शब्द प्रयोग किया तो पेरेन्ट्स ने इकट्ठा होकर उस टीचर को इतना पीटा कि टीचर मर गया, पुलिस आयी तब तक तो देर हो चुकी थी। U.P. में 11 टीचर्स की इस प्रकार मौत (मोबलींचींग) हो चुकी है। 47 जितनी स्कूलों में तोड़-फोड़ और आगजनी की घटनाएँ बन चुकी हैं। और अब कोई भी टीचर CSE पढ़ाने से डर रहा है।


लेकिन CSE पढ़ाना बंद करने पर जो शून्यावकाश (Vacuum) पैदा हुआ, उस से बच्चे पोर्नोग्राफी देखने लगे। सुप्रीम कोर्ट ने सन्-2025 में कहा कि CSE को अनिवार्य (Mandatory) कीजिये वरना बच्चे पोर्न देखकर सीखेंगे, लेकिन हकीकत में पोर्नोग्राफी और CSE में कुछ ज्यादा फर्क नहीं है। पोर्नोग्राफी का डर दिखाकर CSE को दिमाग में घुसाया है, यह शतरंज है, जिसमें चाल भी मेरी और घर भी मेरा... (चित भी मेरा, पट भी मेरा)


U.P. प्रयागराज-सन् 2024, मासिक धर्म के बारे में गलत जानकारी देकर CSE ने बवाल खड़ी कर दी। U.P. में सन्-2020 से 2025 तक 2300 बेटियाँ इन्फेक्शन के कारण मर चुकी हैं। सारे के सारे आँकड़े CSE स्कूलों के हैं। WHO फिर भी CSE की वकालत करने के समर्थन में कहता है कि CSE तो सेफ है, लेकिन भारत राष्ट्र में ट्रेनिंग की कमी के कारण CSE उल्टा पड़ रहा है। यौन शिक्षा का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि, CSE सीखने के बाद अपने इर्द-गिर्द रहे विजातीय पात्र (पुरुष के लिए स्त्री, स्त्री के लिए पुरुष विजातीय) में बहन-बेटी-माँ जैसे पवित्र रिश्तों की (या भाई-बेटा या पिता की पवित्र रिश्तों की) दृष्टि बदलकर उपभोग एवं उपभोक्ता के रिश्तों की दृष्टि छा जाती है, जिसके चलते घरों में भी महिलाओं के असुरक्षित रहने की संभावनाएँ बढ़ जायेगी। खतरनाक ऐसे इन लोगों को, आमजनता में सारी एबनोर्मल चीजें अब नोर्मल (यानी आम) बना देनी है।


बच्चे पोर्न देखने लगे तो इस समस्या का समाधान फोन में पोर्न ब्लॉक करने वाली एप्प इन्स्टॉल करने का हो सकता है। (Custodio या Family Link app लगा सकते हैं।) बच्चों को फोन नहीं देना या टाइम लिमिट तय करना भी एक समाधान हो सकता है। बच्चों को प्रतिदिन पूछते रहना कि, स्कूल में पढ़ाई के दौरान नया क्या सीखा है और यदि बच्चा आकर यौन शिक्षा के बारे में कुछ बताये तो उस पर टूट नहीं पड़ना है, शांति से सारी जानकारी हासिल करके उचित निर्णय लेना है।


बच्चे को कहना कि CSE का क्लास अटेण्ड नहीं करना और यदि जबरन अटेण्ड करने के लिए उस पर स्कूल मेनेजमेन्ट दबाव बनाये तो बच्चों को ऐसी गंदी स्कूल से उठा लेना।


यदि आपके मासूम पर कोई अत्याचार (यौन शोषण या छेड़खानी) हो तो NCPCR (National Commission for Protection of Child Rights) पर शिकायत दर्ज करवानी, POCSO में भी केस दर्ज करवा सकते हैं। लेकिन CSE के नाम से जो गंदगी आपके बच्चों के दिमाग में डालने की पूरी तैयारी हो चुकी है, उससे आपके बच्चे को आप ही बचा सकते हो, आप जैसे समझदार अभिभावक यदि संगठित हो जाये तो किसी के भी पिताजी की ताकत नहीं है कि वो CSE लागू कर पायें।


हमारे टीम मेम्बर्स ने दी हुई जानकारी के मुताबिक एलन मस्क ने एक डॉक्यूमेन्ट्री रिलीज की है, 'War on Children' जो बताती है कि, अमेरिका इत्यादि में बच्चों की हालत कितनी खराब है, खासतौर से संस्कारों के क्षेत्र में। बच्चों के जेंडर चेंज के ऑपरेशन, बच्चों के माँ-बाप को पूछे बिना ही हो रहे हैं। उसमें भी जो माताएँ डीवोर्सी होने के कारण अकेली है, उसके बच्चों पर सबसे ज्यादा जोखिम है, जो कि एक्सट्रीम डेंजरस बातें हैं।


क्या हमने अपने बच्चों को स्नान करना नहीं सिखाया है कि अब CSE के माध्यम से बच्चों को स्नान एवं शरीर की सफाई सिखवाई जाये। क्या हमने अपने बच्चों को मर्यादा में ही महानता और संयम में ही शक्ति का पाठ नहीं सिखाया है अभी तक? क्या हम अपने बच्चों को शारीरिक विकास की साधारण समझ देने में भी कच्चे पड़ गये कि स्कूलवालों को इन्टरफीयर (interfere) करना पड़े?


यदि समस्त भारत के सभी शिक्षा संस्थानों को एक ही छत के नीचे लाकर 'One Nation One Syllabus' देना शुरू कर देंगे तो मजबूरन अनेक सज्जनों को अपनी संतानों को स्कूल से निकाल देना पड़ेगा। श्री नरेन्द्रभाई मोदी जैसे संस्कारप्रेमी प्रधानमंत्री से हम आज भी आशा रख कर बैठे हैं, क्योंकि सन्-2007 में जब यौन शिक्षा लागू होने वाली थी, तब उन्होंने इस राक्षसी-पाशवी यौन शिक्षा को (गुजरात में) लागू नहीं होने दिया था, अब जब यौन शिक्षा का मृत्यु घंटा फिर से बजने लगा है तब हम किस पर भरोसा रखेंगे? जिन्होंने पहले भी संस्कारों की सुरक्षा की थी, उन्हीं पर…


CSE बलात्कार से बचाने के लिए नहीं लाया जा रहा, CSE एड्स जैसे संक्रामक रोगों से बचाने के लिए भी नहीं आ रहा है, CSE आपके बच्चों को बेड टच से बचाने के लिए भी नहीं लाया जा रहा। CSE का मकसद कुछ और ही है। असलियत में CSE जनसंख्या नियंत्रण के लिए, बच्चों को निर्वीर्य और निःसत्त्व बनाने के लिए, शादी से पहले और बाद के व्यभिचार को प्रोत्साहित करने के लिए, गर्भनिरोधकों का व्यापार बढ़ाने के लिए, दवाइयों से लोगों के पेट और पाप की कमाई से अपनी जेब भरने के लिए, रोग प्रतिरोधक शक्तियों को कम करने के लिए, पारिवारिक-शारीरिक-मानसिक-आर्थिक सामाजिक सभी व्यवस्थाओं को तहस-नहस करने के लिए (CSE) लाया जा रहा है।


सावधान ! खबरदार ! होशियार !


(Article Source of information वेबसाईट Stop world control + Sureshji)

1 Comment


Guest
Feb 13

मैं अशोक जैन अध्यक्ष संग्राम सेना आपसे सहमत हूं और मैं क्या कर सकता हूं? बताईए।

93280 99280 अहमदाबाद

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