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The Faithbook Blog


योग्यता के भेद से धर्म का भेद…
जिनशासन की एक अनुपम विशेषता है जीव की योग्यता के अनुसार उसके लिए धर्म बदलता है। करपात्री लब्धि वाले साधु पात्र नहीं रखतें और हाथ में गोचरी वापरते हैं – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि पात्र रखने से संभावित मूर्छा आदि दोषों से बचाव होता है, और लब्धि होने के कारण हाथ से आहार गिरता नहीं।) ऐसी लब्धि न हो, तो साधु पात्र रखते हैं – वह उसके लिए धर्म है। (क्योंकि अगर पात्र न रखे, तो हाथ से आहार गिर सकता है, लोकनिंदा होती है... और भी कई दोष हैं।) जिन्होंने पर्याप्त शास्त्र-अध्ययन कर लिय

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Apr 152 min read


भविष्य का बालक? बालक का भविष्य ? भाग-4
इस एपिसोड में कुछ गंभीर एवं खतरनाक जानकारी पाठकों के साथ सरल शब्दों में शेयर करने की इच्छा है। कभी-कभी आप को सजग करने के लिए रिसर्च के आधार पर भविष्य की जो-जो बातें सुनाई जाती हैं, वह हमेशा सत्य ही हो ऐसा भी नहीं है, लेकिन मेरा कार्य किसी के खौफनाक प्लान को उजागर करना है। कई सारी भविष्य की बातें सही भी निकली हैं, जैसे कि कोविड-वैक्सीन, सोना-चाँदी के बढ़ते दाम, पानी से इस साल आयी आपदाएं… कुछ भविष्यवाणियां अभी सही होती हुई नहीं दिख रही, तो उसमें समय आगे-पीछे हो सकता है, जैसे कि

Panyas Shri Nirmohsundar Vijayji Maharaj Saheb
Feb 1313 min read


भविष्य का बालक? बालक का भविष्य?
सन् 2025, चेन्नई में मेरा चातुर्मास चल रहा है...। कुछ दिन पहले एक श्राविका बहन वंदन करने के लिए आये थे। उन्होंने जो बात की, वह मुझे चौकाने के लिए काफी थी। उन्हीं के शब्दों में कहूं तो... मेरी बेटी First Standard में पढ़ रही है, कुछ दिन पहले उसे बुखार आया था, तब उस की स्टडी ना रुके इसलिए मैंने जनरल नोलेज (GK) की बुक घर मंगवायी थी। जनरली सारी बुकें तो अपने घर पर ही होती है, लेकिन GK की बुक स्कूलवालों ने घर पर नहीं दी थी, अपने पास ही रखी थी। जब मैंने अपनी बेटी की GK की बुक द

Panyas Shri Nirmohsundar Vijayji Maharaj Saheb
Oct 31, 202510 min read


HPV वैक्सीन का खतरनाक सीन (दृश्य...)
बिहार राज्य में बसे पटना शहर से एक समाचार आए थे। बिहार के विभिन्न जिलों में 9 से 14 साल के आयुवर्ग की लगभग 95 लाख लड़कियों को मुफ्त में...

Panyas Shri Nirmohsundar Vijayji Maharaj Saheb
Dec 24, 20245 min read


क्याँ बच्चों के नाम राशि से ही रखने चाहिए?
अवसर्पिणी काल में प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान वर्तमान की संस्कृति के आद्य स्थापक हैं। सोलह संस्कार की परंपरा प्रभु आदिनाथ से चली आ...

Panyas Shri Dhananjay Vijayji Maharaj Saheb
Nov 5, 20243 min read
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