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योग्यता के भेद से धर्म का भेद…

  • 1 day ago
  • 2 min read

  • जिनशासन की एक अनुपम विशेषता है जीव की योग्यता के अनुसार उसके लिए धर्म बदलता है।


  • करपात्री लब्धि वाले साधु पात्र नहीं रखतें और हाथ में गोचरी वापरते हैं – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि पात्र रखने से संभावित मूर्छा आदि दोषों से बचाव होता है, और लब्धि होने के कारण हाथ से आहार गिरता नहीं।)

ऐसी लब्धि न हो, तो साधु पात्र रखते हैं – वह उसके लिए धर्म है।

(क्योंकि अगर पात्र न रखे, तो हाथ से आहार गिर सकता है, लोकनिंदा होती है... और भी कई दोष हैं।)


  • जिन्होंने पर्याप्त शास्त्र-अध्ययन कर लिया है, ऐसे जिनकल्पी आदि निरपेक्ष साधु आपस में बातचीत भी नहीं करते – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि बातचीत से उन्हें कोई लाभ नहीं, और अपेक्षा उत्पन्न होना आदि हानियाँ संभावित हैं।)

जिन्हें शास्त्र-अध्ययन करना है, ऐसे साधु आपस में स्नेह रखें, पढ़ें-पढ़ाएँ, आपसी व्यवहार रखें – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि उसमें ज्ञान आदि की वृद्धि का लाभ है।)


  • जिन्होंने संपूर्ण संसार का त्याग किया है, ऐसे साधु भगवंत पैसे नहीं कमाते, नहीं रखते, सब कुछ याचना करके ग्रहण करते हैं – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि पैसे की मूर्छा आदि दोषों से बचाव होता है।)

संसार में रहने वाले गृहस्थ यदि याचना द्वारा जीवन-निर्वाह करें – तो वह उनके लिए अधर्म है। (क्योंकि उसमें लोकनिंदा आदि दोष हैं।)


  • जिन्हें सच्चे देव-गुरु-धर्म की समझ है, वे सुदेव के सिवाय किसी को नहीं नमते – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि औरों को नमने में उनके राग आदि दोषों की अनुमोदना का दोष लगता है।)

जिन्हें अभी सच्चे देव-गुरु-धर्म की समझ नहीं है, वे किसी भी देव को मानते हैं – नमते हैं – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि उससे वे पाप-भीरु बनते हैं, पाप से बचते हैं, नास्तिकता से दूर रहते हैं...)


  • संक्षेप में, जिनशासन आत्मकल्याण की इच्छा रखने वाले प्रत्येक जीव का स्वीकार करता है… उसके कल्याण का मार्ग – उसकी योग्यता और संयोगों के अनुसार दिखाता है… किसी एक निश्चित मार्ग का आग्रह नहीं रखता…

आग्रह केवल एक ही बात पर होता है – दोष घटने चाहिए…


  • इसलिए ही, परस्त्रीगमन जैसा अधम पाप न छोड़ सकने वाले वंकचूल के लिए भी जिनशासन कल्याण का मार्ग दिखाता है – कम से कम राजा की रानी को छोड़ देना है… और उसके प्रभाव से उस वंकचूल का आत्म-कल्याण भी हुआ है…


  • जगत के सभी (योग्य) जीवों के लिए, उनकी-अपनी योग्यता के अनुसार आत्मकल्याण का मार्ग दिखाने वाला मेरा जिनशासन महान है !

अहो ! जिनशासनम् !

1 Comment


Pragnesh Shah
6 hours ago

Thank you for sharing ☺️ very nice

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