योग्यता के भेद से धर्म का भेद…
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जिनशासन की एक अनुपम विशेषता है जीव की योग्यता के अनुसार उसके लिए धर्म बदलता है।
करपात्री लब्धि वाले साधु पात्र नहीं रखतें और हाथ में गोचरी वापरते हैं – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि पात्र रखने से संभावित मूर्छा आदि दोषों से बचाव होता है, और लब्धि होने के कारण हाथ से आहार गिरता नहीं।)
ऐसी लब्धि न हो, तो साधु पात्र रखते हैं – वह उसके लिए धर्म है।
(क्योंकि अगर पात्र न रखे, तो हाथ से आहार गिर सकता है, लोकनिंदा होती है... और भी कई दोष हैं।)
जिन्होंने पर्याप्त शास्त्र-अध्ययन कर लिया है, ऐसे जिनकल्पी आदि निरपेक्ष साधु आपस में बातचीत भी नहीं करते – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि बातचीत से उन्हें कोई लाभ नहीं, और अपेक्षा उत्पन्न होना आदि हानियाँ संभावित हैं।)
जिन्हें शास्त्र-अध्ययन करना है, ऐसे साधु आपस में स्नेह रखें, पढ़ें-पढ़ाएँ, आपसी व्यवहार रखें – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि उसमें ज्ञान आदि की वृद्धि का लाभ है।)
जिन्होंने संपूर्ण संसार का त्याग किया है, ऐसे साधु भगवंत पैसे नहीं कमाते, नहीं रखते, सब कुछ याचना करके ग्रहण करते हैं – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि पैसे की मूर्छा आदि दोषों से बचाव होता है।)
संसार में रहने वाले गृहस्थ यदि याचना द्वारा जीवन-निर्वाह करें – तो वह उनके लिए अधर्म है। (क्योंकि उसमें लोकनिंदा आदि दोष हैं।)
जिन्हें सच्चे देव-गुरु-धर्म की समझ है, वे सुदेव के सिवाय किसी को नहीं नमते – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि औरों को नमने में उनके राग आदि दोषों की अनुमोदना का दोष लगता है।)
जिन्हें अभी सच्चे देव-गुरु-धर्म की समझ नहीं है, वे किसी भी देव को मानते हैं – नमते हैं – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि उससे वे पाप-भीरु बनते हैं, पाप से बचते हैं, नास्तिकता से दूर रहते हैं...)
संक्षेप में, जिनशासन आत्मकल्याण की इच्छा रखने वाले प्रत्येक जीव का स्वीकार करता है… उसके कल्याण का मार्ग – उसकी योग्यता और संयोगों के अनुसार दिखाता है… किसी एक निश्चित मार्ग का आग्रह नहीं रखता…
आग्रह केवल एक ही बात पर होता है – दोष घटने चाहिए…
इसलिए ही, परस्त्रीगमन जैसा अधम पाप न छोड़ सकने वाले वंकचूल के लिए भी जिनशासन कल्याण का मार्ग दिखाता है – कम से कम राजा की रानी को छोड़ देना है… और उसके प्रभाव से उस वंकचूल का आत्म-कल्याण भी हुआ है…
जगत के सभी (योग्य) जीवों के लिए, उनकी-अपनी योग्यता के अनुसार आत्मकल्याण का मार्ग दिखाने वाला मेरा जिनशासन महान है !
अहो ! जिनशासनम् !










Thank you for sharing ☺️ very nice