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अति सूक्ष्म आचार-निरूपण

  • 15 hours ago
  • 2 min read


  • प्रभु के शासन में आचारों का जो अति-सूक्ष्म निरूपण है, वह रोमांच खड़ा कर देने वाला है।

साधु भगवंत को विहार करना होता है, उसकी विधि शास्त्र में बताई गई है।

उसमें कितना सूक्ष्मताभरा निरूपण है ! देखिए


  • एक रास्ता पत्थरोंवाला हो, दूसरा रास्ता धूलवाला हो... तो किस रास्ते पर जाना चाहिए ?

एक रास्ते पर पानी हो, दूसरे रास्ते पर घास हो... तो किस रास्ते पर जाना चाहिए ?

ऐसे ढेर सारे विकल्प दिखाकर, उनमें से किस रास्ते पर जाना चाहिए – वह बताया गया है।


  • विहार कब (किस समय) करना चाहिए ?

कौनसे संयोगों में दोपहर में ?

कौनसे संयोगों में सुबह ?

कौनसे संयोगों में प्रातःकाल विहार करना चाहिए ?

यह बताया गया है।


  • विहार शुरू करते समय किसे पहले निकलना चाहिए  ? किसे आखिर में निकलना चाहिए ? – यह बताया गया है।


  • यदि अलग हो गएँ, तो फिर से एकत्र कैसे होना है ? – यह भी बताया गया है।


  • यदि रास्ता पूछना पड़े, तो किससे पूछना चाहिए ? पुरुष से या स्त्री से ?

बालक से, जवान से या वृद्ध से ? – यह भी बताया गया है।


  • विहार निश्चित होने की सूचना लोगों को किन शब्दों में देनी चाहिए ? – यह भी बताया गया है।


  • रास्ते में पानी वापरना पड़े, तो कहाँ वापरना चाहिए ? – यह बताया गया है।


  • रास्ते में गोचरी करनी पड़े, तो कहाँ वहोरनी चाहिए ? कहाँ वापरना चाहिए ? – यह बताया गया है।


  • सामने वाले गाँव में सुबह पहुँचें तो क्या करना चाहिए ?

दोपहर में पहुँचें तो क्या करना चाहिए ?

शाम को पहुँचें तो क्या करना चाहिए ?

यह बताया गया है।


  • सामने वाले गाँव में साधु भगवंत हों तो क्या करना चाहिए ?

साध्वी भगवंत हों तो क्या करना चाहिए ?

श्रावक हों, तो क्या करना चाहिए ?

श्रावक न हों, तो क्या करना चाहिए ?

यह सब बताया गया है।


  • जिस मकान में ठहरना है, उसमें किसे पहले प्रवेश करना चाहिए ? किसे पीछे रहना चाहिए ? – यह भी बताया गया है।


  • गाँव में रहने के लिए मकान कहाँ ढूँढना चाहिए ? यह भी बताया गया है।


  • मकान में आचार्य का आसन कहाँ रखना चाहिए ?

दूसरे साधुओं को संथारा कहाँ करना चाहिए ?

अगर जगह कम हो, तो क्या करना चाहिए ?

अगर जगह ज्यादा हो, तो क्या करना चाहिए ?

अगर जगह माँप की हो, तो क्या करना चाहिए ?

दो संथारों के बीच और ऊपर-नीचे कितनी जगह खाली रखनी चाहिए ?

यह भी बताया गया है।


  • धर्मशाला जैसे मकान में उतरना पड़े, जहाँ दूसरे मुसाफिर आते हों, तो क्या सावधानी रखनी चाहिए ?

अगर वे मुसाफिर भद्रिक परिणामी हों, तो क्या सावधानी रखनी चाहिए ?

अगर वे मुसाफिर विधर्मी हों, तो क्या सावधानी रखनी चाहिए ?

यह भी बताया गया है।


  • थक गए ?

आज की वर्तमान परिभाषा में कहूं तो ISO 9000 स्टैंडर्ड में जैसे Procedure (कार्यप्रणाली) Well defined (अच्छी तरह से परिभाषित) होनी चाहिए, उसी तरह सब कुछ बताया गया है।


  • यह तो केवल विहार की बात हुई। ऐसा ही गोचरी (भिक्षा) के लिए भी है, और उससे भी ज्यादा है।

दुनिया के किसी भी धर्म में इतना सूक्ष्म निरूपण नहीं मिलेगा।

नहीं मले, नहीं मले, नहीं मले रे... शासन आवुं जगत मां नहीं मले रे!

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