top of page
Profile
Join date: Apr 24, 2024
Posts (9)
May 13, 2026 ∙ 6 min
निश्चय-व्यवहार
जिनशासन की एक अनुपम विशेषता है – धर्म (या गुण) के निश्चय और व्यवहार, ऐसे दो प्रकार बताए गए हैं। आत्मा में प्रकट होने वाला गुण (या नाश होने वाला दोष) – वह निश्चय है। उसे प्रकट करने के लिए आवश्यक ऐसी बाहरी क्रिया, या यदि गुण प्रकट ही हो, तो उससे स्वाभाविक रूप से बाहर होती हुई क्रिया – वह व्यवहार है। दृष्टांतों से यह विषय स्पष्ट होगा। व्यवहार नय ऐसा कहेगा कि जो साधु का वेश पहनता है, जिसमें साधु के आचारों का पालन दिखता है, वह साधु है। निश्चय नय ऐसा कहेगा कि जिसमें महाव्रतों के पालन की परिणति है,...
117
0
Apr 15, 2026 ∙ 2 min
योग्यता के भेद से धर्म का भेद…
जिनशासन की एक अनुपम विशेषता है जीव की योग्यता के अनुसार उसके लिए धर्म बदलता है। करपात्री लब्धि वाले साधु पात्र नहीं रखतें और हाथ में गोचरी वापरते हैं – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि पात्र रखने से संभावित मूर्छा आदि दोषों से बचाव होता है, और लब्धि होने के कारण हाथ से आहार गिरता नहीं।) ऐसी लब्धि न हो, तो साधु पात्र रखते हैं – वह उसके लिए धर्म है। (क्योंकि अगर पात्र न रखे, तो हाथ से आहार गिर सकता है, लोकनिंदा होती है... और भी कई दोष हैं।) जिन्होंने पर्याप्त शास्त्र-अध्ययन कर लिया है, ऐसे...
148
1
2
Mar 12, 2026 ∙ 2 min
अति सूक्ष्म आचार-निरूपण
प्रभु के शासन में आचारों का जो अति-सूक्ष्म निरूपण है, वह रोमांच खड़ा कर देने वाला है। साधु भगवंत को विहार करना होता है, उसकी विधि शास्त्र में बताई गई है। उसमें कितना सूक्ष्मताभरा निरूपण है ! देखिए एक रास्ता पत्थरोंवाला हो, दूसरा रास्ता धूलवाला हो... तो किस रास्ते पर जाना चाहिए ? एक रास्ते पर पानी हो, दूसरे रास्ते पर घास हो... तो किस रास्ते पर जाना चाहिए ? ऐसे ढेर सारे विकल्प दिखाकर, उनमें से किस रास्ते पर जाना चाहिए – वह बताया गया है। विहार कब (किस समय) करना चाहिए ? कौनसे संयोगों में दोपहर...
195
0
2
bottom of page
