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Join date: Apr 24, 2024

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Aug 6, 20262 min
प्रायश्चित्त की व्यवस्था
परमात्मा के शासन की एक कम प्रसिद्ध लेकिन अद्भुत विशेषता है प्रायश्चित्त की व्यवस्था। पापों के प्रायश्चित्त को बताने वाले विशेष (Special) ग्रंथ जिनशासन में उपलब्ध हैं, जो हज़ारों श्लोकों के प्रमाण में हैं। उनमें वर्णित कुछ खास विशेषताओं को संक्षेप में देखते हैं ➡ पाप करने के कारण के आधार पर प्रायश्चित्त का भेद पाप किन कारणों से होता है – यह जिनशासन में विस्तृत रूप से बताया है। मुख्यतः पाँच कारण बताए गए हैं अनाभोग (अज्ञान), सहसात्कार (अचानक हो जाना), प्रमाद (आलस्य, सुखप्रियता आदि), दर्प...

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Jul 8, 20262 min
अविरति से पापबंध
जिनशासन की एक अनुपम विशेषता है वह केवल पाप-प्रवृत्ति को ही नहीं, बल्कि पाप की अविरति को भी पाप मानता है, कर्मबंध का कारण मानता है। इस बात को विस्तार से समझते हैं। मान लो कि आप आज तक विदेश नहीं गए हो, और भविष्य में जाने की कोई योजना अभी नहीं है। मैं आपसे कहूं – “जीवन में कभी विदेश न जाना” ऐसी प्रतिज्ञा ले लो। क्या आप यह प्रतिज्ञा लोगे ? अधिकतर लोगों का उत्तर होगा – "नहीं"। क्यों ? यदि विदेश जाने की अभी कोई योजना है ही नहीं, तो भी प्रतिज्ञा लेने की तैयारी क्यों नहीं होती ? क्योंकि मन में यह...

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Jun 3, 20266 min
उत्सर्ग-अपवाद
जिनशासन की अप्रतिम विशेषताओं में से एक है - जिनशासन में मार्ग के दो प्रकार बताए गए हैं – उत्सर्ग और अपवाद। कोई विशेष कारण न हो, तब जिसका आचरण करना है, उसे उत्सर्ग कहते हैं। विशेष कारण आने पर जिसका आचरण करना है, उसे अपवाद कहते हैं। उदाहरणों से यह विषय स्पष्ट होगा। साधु-साध्वी भगवंतों के आचरण में उत्सर्ग-अपवाद को समझते हैं - 1.रोज एकासणा करना – एक ही बार गोचरी वापरना, वह उत्सर्ग है। बीमारी हो, वृद्धावस्था हो, विहार-प्रवचन-पठन आदि का कठोर परिश्रम हो, तपस्या का पारणा हो, शरीर कोमल होना आदि कारणों...

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