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The Faithbook Blog


नये धर्मस्थान या विद्यामंदिर (जैन स्कूल)? वर्तमान युग में अधिक आवश्यक क्या है?
धर्मस्थान — पुण्य की वृद्धि कराता है, शुभभावों की वृद्धि कराता है, साधना में प्रगति कराता है। और जैन स्कूल — गलत आदतों, कुसंस्कारों और कुसंग से बचाता है, सात व्यसनों और कृतघ्नता जैसे बड़े पापों से बचाता है। धर्मस्थान : आत्मा के विकास का केंद्र है। जैन स्कूल : आत्मा की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। “Development” और “Defense” — इन दोनों में प्राथमिकता सदैव “Defense” की ही होती है। आने वाले निकट भविष्य में अनेकों नये धर्मस्थान तो विद्यमान होंगे,लेकिन वहाँ जाने वाले जैन ही नहीं बचे

Muni Shri Tripadiratna Vijayji Maharaj Saheb
4 days ago2 min read


जैनत्व वेदना… जैनत्व संवेदना… Part 2
गत प्रकरण में तेलंगाना राज्य में जिज्ञासु एवं भावुक लोगों के द्वारा पूछे गये प्रश्नों की सूचि जारी की थी, अब इस प्रकरण में कुछ अच्छे अनुभव आप से शेयर करना चाहता हूँ। गत प्रकरण में बताया था कि, तेलंगाना राज्य से जब विहार चल रहा था हमारे साथ रहे हुए महात्मा, विहार में स्थान पर पहुँचने में कभी-कभी देर कर देते थे, और जब उसका कारण पता चलता था तो आनंद होता था कि, चलो, अच्छे काम के कारण देरी हो तो अच्छी बात है। अच्छे काम में देरी नहीं होनी चाहिए, लेकिन अच्छे काम के कारण देरी यदि होत

Panyas Shri Nirmohsundar Vijayji Maharaj Saheb
May 278 min read


योग्यता के भेद से धर्म का भेद…
जिनशासन की एक अनुपम विशेषता है जीव की योग्यता के अनुसार उसके लिए धर्म बदलता है। करपात्री लब्धि वाले साधु पात्र नहीं रखतें और हाथ में गोचरी वापरते हैं – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि पात्र रखने से संभावित मूर्छा आदि दोषों से बचाव होता है, और लब्धि होने के कारण हाथ से आहार गिरता नहीं।) ऐसी लब्धि न हो, तो साधु पात्र रखते हैं – वह उसके लिए धर्म है। (क्योंकि अगर पात्र न रखे, तो हाथ से आहार गिर सकता है, लोकनिंदा होती है... और भी कई दोष हैं।) जिन्होंने पर्याप्त शास्त्र-अध्ययन कर लिय

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Apr 152 min read


मार्गदर्शक गुरु
जिनशासन का गुरुतत्त्व तो अनुपम है ही, साथ ही इसकी एक अद्भुत विशेषता यह भी है कि आत्महित का मार्गदर्शन के लिए जिस गुरु से लेना है, उन्हें सामान्य गुरु से भिन्न करता है। जो साधु आचारों से सम्पन्न हो, वह वंदनीय है, पूजनीय है — इसमें कोई संदेह नहीं। लेकिन आत्महित के मार्गदर्शन के लिए केवल आचारसंपन्नता पर्याप्त नहीं है। दृष्टांत से यह बात समझ में आएगी। यदि कार चलाने के लिए ड्राइवर चाहिए, तो वह सज्जन हो – यह तो ज़रूरी है ही — उस पर विश्वास किया जा सके, चोरी न करे, नशा न करे — यह

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Feb 42 min read


गुरुतत्व
जैसे जिनशासन के परमात्मा अद्वितीय हैं, वैसे ही जिनशासन में गुरुतत्त्व भी अनुपम है। अन्य सभी दर्शनों के संन्यास की तुलना में, जिनशासन का संयम विशिष्ट है, दोषों के नाश के लिए सक्षम है। यदि उसका पूरा वर्णन करना हो, तो एक ग्रंथ लिखना पड़ेगा। आइए, कुछ अत्यंत अलग दिखाई देने वाली विशेषताओं को देखें... विहार जैन साधु का कोई भी स्थायी स्थान – मकान, आश्रम, मठ, घर नहीं होता। वे सदैव चलते रहते हैं। इससे स्थान के ममत्व और स्थान से जुड़ी व्यक्तियों के प्रति ममत्व, और उनसे उत्पन्न होने वाले

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Jan 72 min read


परमात्मा की वीतरागता
अन्य सभी दर्शनों की अपेक्षा, जिनशासन में एक अनुपम विशेषता देखने को मिलती है – जिन्हें परमात्मा माना गया है, उनमें कोई दोष दिखाई नहीं देता। कईं दर्शनों में माने गए ईश्वर का पत्नी-पुत्र आदि परिवार होता है... और इसलिए, उस ईश्वर में "यह मेरी पत्नी है, मेरा पुत्र है..." ऐसा ममत्व, उनके प्रति आसक्ति, मालिकाना भाव (परिग्रह)... उन्हें परेशान करने वालों पर क्रोध, द्वेष... आदि दोष देखे जाते हैं। जिनशासन जिन्हें परमात्मा मानता है, उन्होंने परिवार का त्याग कर के साधना द्वारा अपने दोषों क

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Nov 15, 20252 min read


“शांत रहो, ताकि जैनों की नींद न टूटे...”
कुछ ही दिनों में जिनशासन की स्थापना का पावन दिन आने वाला है। कुछ स्थानों पर इसको लेकर थोड़ी बहुत चहल-पहल दिखाई दे रही है, लेकिन जिस...

Panyas Shri Dhananjay Vijayji Maharaj Saheb
May 2, 20257 min read


सम्राट अशोक जैन था कि बौद्ध?
भावेश राजपूत को मैंने कहा, “मुझे तो कोई सच्चा जिज्ञासु मिल जाए, तो मैं अपने ज्ञान की धारा उस पर बरसा दूँ।” और हुआ भी ऐसा। केवल 40 मिनट का...

Muni Shri Tirthbodhi Vijayji Maharaj
Mar 18, 20254 min read


युवा पीढ़ी धर्म से दूर क्यों हो रही हैं?
"अनंत जन्मों में संचित किए हुए पुण्यों के फलस्वरूप ही हमें ऐसा लोकोत्कृष्ट जिन शासन प्राप्त होता है..." ऐसी अनेक बातें अनेक बार कहने के...

Panyas Shri Dhananjay Vijayji Maharaj
Feb 27, 20254 min read
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