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The Faithbook Blog


योग्यता के भेद से धर्म का भेद…
जिनशासन की एक अनुपम विशेषता है जीव की योग्यता के अनुसार उसके लिए धर्म बदलता है। करपात्री लब्धि वाले साधु पात्र नहीं रखतें और हाथ में गोचरी वापरते हैं – वह उनके लिए धर्म है। (क्योंकि पात्र रखने से संभावित मूर्छा आदि दोषों से बचाव होता है, और लब्धि होने के कारण हाथ से आहार गिरता नहीं।) ऐसी लब्धि न हो, तो साधु पात्र रखते हैं – वह उसके लिए धर्म है। (क्योंकि अगर पात्र न रखे, तो हाथ से आहार गिर सकता है, लोकनिंदा होती है... और भी कई दोष हैं।) जिन्होंने पर्याप्त शास्त्र-अध्ययन कर लिय

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Apr 152 min read


युवा पीढ़ी धर्म से दूर क्यों हो रही हैं?
"अनंत जन्मों में संचित किए हुए पुण्यों के फलस्वरूप ही हमें ऐसा लोकोत्कृष्ट जिन शासन प्राप्त होता है..." ऐसी अनेक बातें अनेक बार कहने के...

Panyas Shri Dhananjay Vijayji Maharaj
Feb 27, 20254 min read


क्या जैनशासन का भविष्य संकट में है?
भारत में धार्मिक जनसंख्या का वितरण: एक विश्लेषण (1950-2015) भारत एक विविधतापूर्ण देश है, जहाँ विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का संगम होता...

Panyas Shri Dhananjay Vijayji Maharaj Saheb
Jan 31, 20256 min read


आपकी उम्र
छगन: “लिली! तेरी उम्र कितनी है?” लिली: “17 साल।” छगन: “ओहो! तूने तो जिंदगी भर के शनि-रवि को जोड़ा ही नहीं है।” यदि शनि-रवि जोड़ दिए...

Aacharya Shri Ajitshekhar Suriji Maharaj Saheb
Sep 10, 20242 min read


जैन को कट्टर बनना चाहिए या नहीं?
अनेक जन्मों में किए हुए शुभ कर्मों के परिणाम हमें जैन धर्म मिला है। परंतु इस भव में प्रभु वीर के शासन प्राप्ति के पश्चात जो हमारे दिलों...

Panyas Dhananjay Vijay Maharaj
May 16, 20244 min read


धर्म में हमारी प्रगति क्यूं नहीं होती?
करुणा के सागर श्री अरिहंत परमात्मा ने अपने ज्ञान से जगत के जीवों को दुःख से त्रस्त देखकर, दुःख से हमेशा के लिए मुक्त होने का - शाश्वत...

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Apr 24, 20243 min read
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