top of page
The Faithbook Blog


निश्चय-व्यवहार
जिनशासन की एक अनुपम विशेषता है – धर्म (या गुण) के निश्चय और व्यवहार, ऐसे दो प्रकार बताए गए हैं। आत्मा में प्रकट होने वाला गुण (या नाश होने वाला दोष) – वह निश्चय है। उसे प्रकट करने के लिए आवश्यक ऐसी बाहरी क्रिया, या यदि गुण प्रकट ही हो, तो उससे स्वाभाविक रूप से बाहर होती हुई क्रिया – वह व्यवहार है। दृष्टांतों से यह विषय स्पष्ट होगा। व्यवहार नय ऐसा कहेगा कि जो साधु का वेश पहनता है, जिसमें साधु के आचारों का पालन दिखता है, वह साधु है। निश्चय नय ऐसा कहेगा कि जिसमें महाव्रतों के पा

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
May 136 min read


कुछ अनकही अनसुनी बातें – 2
गतांक में हमने देखा कि जिस व्यक्ति को लोग खूंखार, हिंसक और क्रूर जैसे उपनामों से जानते थे - वही अकबर कैसे दयालु, अहिंसक और परोपकारी...

Muni Shri Tirthbodhi Vijayji Maharaj Saheb
Jul 3, 20253 min read


केस रामायण-महाभारत का
छगन वकील को मगन ने पूछा, “रामायण-महाभारत के बारे में क्या जानते हो?” छगन: “महाभारत में लैंड डिस्प्यूट का मामला था, सिविल केस था। रामायण...

Aacharya Shri Ajitshekhar Suriji Maharaj Saheb
Dec 3, 20242 min read


‘गंभीर रोग ‘अगंभीरता’ का...’
अभी सोशल मीडिया पर एक कहानी वायरल हो रही है और साथ में एक खबर भी चर्चा में है। चलो पहले खबर सुना देते है। सोनाक्षी सिंहा (शत्रुध्न सिंहा...

Panyas Shri Nirmohsundar Vijayji Maharaj Saheb
Jul 10, 20248 min read
From the significance of daily rituals to the profound teachings of Jainism,
our blogs offer a treasure trove of knowledge
Languages:
Categories:
Top Posts






bottom of page

