top of page
The Faithbook Blog


चरण-स्पर्श का महत्व
भारतीय परंपरा में ‘चरण-स्पर्श’ का इतना गहरा महत्व क्यों है? चाहे परमात्मा हों, सद्गुरु हों,या माता-पिता जैसे हमारे बुज़ुर्ग हों — सबके ‘चरण-स्पर्श’ का उल्लेख हमारे कल्चर में बार-बार आता है। दिवाली जैसे पर्वों पर माता-पिता के चरण स्पर्श कर उनके आशीर्वाद लेने की परंपरा होती है... अंजनशलाका जैसे मंगल विधानों में “अनंत गुरुपादुकेभ्यो नमः” के माध्यम से सद्गुरु के ‘चरण-वंदन’ की ही बात आती है... जब हम शत्रुंजय जाते हैं — पाँच चैत्यवंदन करते हैं, दादा आदिनाथ का चैत्यवंदन करते हैं, फ

Muni Shri Tripadiratna Vijayji Maharaj Saheb
Nov 18, 20252 min read


वेतन बढ़ाने का क्या हुआ?
छगन ने अलमारी के आईने पर जमी धूल की परत को देखकर, नौकर का ध्यान खींचने के लिए उसी धूल में ही अंगुली से लिख दिया, 'धूल बराबर साफ करो।'...

Aacharya Shri Ajitshekhar Suriji Maharaj Saheb
Jul 31, 20242 min read


गड़बड़ी करने वाले साधु की निंदा करने से पाप लगता है?
आज एक कहानी से शुरू करते है। एक नगर में एक बड़ा उस्ताद चोर था। बड़े बड़े घरों में चोरी करता था। फिर भी कभी राजरक्षकों के हाथ में नहीं आता...

Panyas Shri Dhananjay Vijayji Maharaj
Jul 19, 20247 min read


अम घर आवत नाथ
किस तरह से करे? यह हमारा प्रश्न है। करना है कि नहीं? यह ज्ञानिऔं का प्रश्न है। यदि करना हो, तो उस करने के रास्ते पर दौड़ना शुरू करो। आत्म...

Priyam
Jul 5, 20241 min read
From the significance of daily rituals to the profound teachings of Jainism,
our blogs offer a treasure trove of knowledge
Languages:
Categories:
Top Posts






bottom of page

