जहाँ-जहाँ पर विहार करके गया और जिन-जिन संघों में प्रवचन किया, वहाँ पर मैंने जब-जब एक प्रश्न सभा से पूछा, कि, अपने जैन धर्म का मुख्य सिद्धांत कौनसा है? क्या है? तब - तब मुझे अक्सर एक जवाब प्रायः सुनने में आया, ‘अहिंसा परमो धर्म:!' या फिर दूसरा जवाब ये सुनने में आया कि, ‘जीओ और जीने दो।' मुझे आश्चर्य इस बात का था कि, कई सालों से प्रवचन सुनने वालों में भी अज्ञानता किस हद तक छायी हुई है। रटा-रटाया उधार उत्तर देकर वे लोग अपने आप ही किस प्रकार संतुष्टि की साँस ले रहे थे, वो मैंने अ
जिनशासन की अप्रतिम विशेषताओं में से एक है - जिनशासन में मार्ग के दो प्रकार बताए गए हैं – उत्सर्ग और अपवाद। कोई विशेष कारण न हो, तब जिसका आचरण करना है, उसे उत्सर्ग कहते हैं। विशेष कारण आने पर जिसका आचरण करना है, उसे अपवाद कहते हैं। उदाहरणों से यह विषय स्पष्ट होगा। साधु-साध्वी भगवंतों के आचरण में उत्सर्ग-अपवाद को समझते हैं - 1.रोज एकासणा करना – एक ही बार गोचरी वापरना, वह उत्सर्ग है। बीमारी हो, वृद्धावस्था हो, विहार-प्रवचन-पठन आदि का कठोर परिश्रम हो, तपस्या का पारणा हो, शरीर कोम