परमात्मा के शासन की एक कम प्रसिद्ध लेकिन अद्भुत विशेषता है प्रायश्चित्त की व्यवस्था। पापों के प्रायश्चित्त को बताने वाले विशेष (Special) ग्रंथ जिनशासन में उपलब्ध हैं, जो हज़ारों श्लोकों के प्रमाण में हैं। उनमें वर्णित कुछ खास विशेषताओं को संक्षेप में देखते हैं ➡ पाप करने के कारण के आधार पर प्रायश्चित्त का भेद पाप किन कारणों से होता है – यह जिनशासन में विस्तृत रूप से बताया है। मुख्यतः पाँच कारण बताए गए हैं अनाभोग (अज्ञान), सहसात्कार (अचानक हो जाना), प्रमाद (आलस्य, सुखप्रियता आ
अन्य सभी दर्शनों की अपेक्षा, जिनशासन में एक अनुपम विशेषता देखने को मिलती है – जिन्हें परमात्मा माना गया है, उनमें कोई दोष दिखाई नहीं देता। कईं दर्शनों में माने गए ईश्वर का पत्नी-पुत्र आदि परिवार होता है... और इसलिए, उस ईश्वर में "यह मेरी पत्नी है, मेरा पुत्र है..." ऐसा ममत्व, उनके प्रति आसक्ति, मालिकाना भाव (परिग्रह)... उन्हें परेशान करने वालों पर क्रोध, द्वेष... आदि दोष देखे जाते हैं। जिनशासन जिन्हें परमात्मा मानता है, उन्होंने परिवार का त्याग कर के साधना द्वारा अपने दोषों क