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The Faithbook Blog


नये धर्मस्थान या विद्यामंदिर (जैन स्कूल)? वर्तमान युग में अधिक आवश्यक क्या है?
धर्मस्थान — पुण्य की वृद्धि कराता है, शुभभावों की वृद्धि कराता है, साधना में प्रगति कराता है। और जैन स्कूल — गलत आदतों, कुसंस्कारों और कुसंग से बचाता है, सात व्यसनों और कृतघ्नता जैसे बड़े पापों से बचाता है। धर्मस्थान : आत्मा के विकास का केंद्र है। जैन स्कूल : आत्मा की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। “Development” और “Defense” — इन दोनों में प्राथमिकता सदैव “Defense” की ही होती है। आने वाले निकट भविष्य में अनेकों नये धर्मस्थान तो विद्यमान होंगे,लेकिन वहाँ जाने वाले जैन ही नहीं बचे

Muni Shri Tripadiratna Vijayji Maharaj Saheb
Jun 102 min read


Jainism is the World Best!
विश्व में धर्म और संप्रदाय अनेक हैं, लेकिन सबका लक्ष्य एक ही है –"हमारे धर्म के अनुयायी सदा सुखी रहें" और इसके लिए अच्छे विचार, वाणी और आचरण सिखाना। Vision देना Wisdom देना Morals & Ethics कि Traning देना इन सभी चीजों का जहाँ Presentation होता है, उस Literature को धर्मग्रंथ कहा जाता है। और इन सभी को जो सही प्रकार से आनंदपूर्वक ग्रहण करते हैं और अनुयायियों को सिखाते हैं, उन्हें धर्मगुरु कहा जाता है।एक शोध के अनुसार, वर्तमान में विश्व में लगभग 302 धर्म हैं और 3955 से अधिक संप्र

Muni Shri Tripadiratna Vijayji Maharaj Saheb
May 7, 20254 min read
From the significance of daily rituals to the profound teachings of Jainism,
our blogs offer a treasure trove of knowledge
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