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The Faithbook Blog


द्रव्य - व्यवस्था
दान के रूपमें प्राप्त (या धार्मिक सम्पत्तियों से आय रूप में प्राप्त) धार्मिक संपत्ति की व्यवस्था किस प्रकार करनी चाहिए ? इसकी एक सुदृढ़ व्यवस्था जिनशासन में है, जो अन्य किसी भी दर्शन में देखने को नहीं मिलती। अन्य दर्शनों में मंदिरों में आने वाली दान-पेटियों की आय के मालिक, मंदिर के मालिक या पुजारी बन जाते हैं... और मंदिर को अपने जीवन-निर्वाह (या ऐशो-आराम) का साधन बना देते हैं। लेकिन जिनशासन में एक अटूट सिद्धांत है – जिस कार्य के लिए दान प्राप्त हुआ हो, उसी (या वैसे ही) कार्य

Pujya Panyas Shri Bhavyasundar Vijayji Maharaj
Sep 222 min read


धार्मिक प्रसंगों में आडंबर पर Control क्यों नहीं ?
प्रश्न: जब विवाह जैसे सांसारिक प्रसंगों को सादगी से मनाने की प्रेरणा दी जाती है, तो फिर धर्मगुरु धार्मिक प्रसंगों में होने वाले इतने अधिक खर्च और आडंबर पर Control क्यों नहीं रखते? उत्तर: खर्च और आडंबर मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं — 1. व्यक्ति-केन्द्रित 2. भक्ति-केन्द्रित व्यक्तिगत प्रशंसा, किसी साधु-साध्वी या गृहस्थ की वाह-वाह के लिए किया गया खर्च धर्मसम्मत नहीं माना जाता। ऐसी दिखावटी प्रवृत्ति को परमात्मा का शासन कभी स्वीकार नहीं करता। लेकिन जो खर्च या आयोजन जैन-अजैन भ

Muni Shri Tripadiratna Vijayji Maharaj Saheb
Feb 183 min read


केस रामायण-महाभारत का
छगन वकील को मगन ने पूछा, “रामायण-महाभारत के बारे में क्या जानते हो?” छगन: “महाभारत में लैंड डिस्प्यूट का मामला था, सिविल केस था। रामायण...

Aacharya Shri Ajitshekhar Suriji Maharaj Saheb
Dec 3, 20242 min read
From the significance of daily rituals to the profound teachings of Jainism,
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