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The Faithbook Blog


आत्मा स्वयं है, स्वयंभू है, वो ही प्रभु है।
परमात्मा देह को संयोग के रूप में धारण करते हुए भी स्वरूप से देह को धारण नहीं कर रहे थे। धारण करने के लिए धारणा चाहिए, और धारणा उसकी की...

Panyas Shri Labdhivallabh Vijayji Maharaj Saheb
Nov 1, 20212 min read


प्रयोजनशून्यता ही पूर्णता है।
प्रभु गर्भ में भी पूर्णजागृत थे। गर्भ सृजन का स्थान है, सृजन शरीर का होता है। प्रभु सृजन से परे हैं। जो नजदीक है, इतना पास कि आप उसे पास...

Panyas Shri Labdhivallabh Vijayji Maharaj Saheb
Apr 10, 20212 min read


सर्वस्वीकार की साधना
माता त्रिशला के हृदय की संवेदना इतनी गहरी थी, उनका पुत्र-राग इतना था, कि पुत्र-वियोग आयुष्य को उपक्रांत कर सकता था…। प्रभु खुद को...

Panyas Shri Labdhivallabh Vijayji Maharaj Saheb
Apr 10, 20212 min read


आत्मजागृति का अखंड दीप
प्रभु महावीर आतमजागृति का अखंड दीप है। प्रभु महावीर का अर्थ होता है औरों से अन छुआ निजत्व। प्रभु महावीर का मतलब है जिनको किसी से भी मतलब...

Panyas Shri Labdhivallabh Vijayji Maharaj Saheb
Jul 27, 20203 min read


सत्य ध्रुव है
प्रभु महावीर ‘सत्’ को जीने वाले थे। ‘सत्’ उनका जीवन-दर्शन था। सत् का अर्थ है सत्य, और सत्य का अर्थ है ध्रुव। जो ध्रुव नहीं है, वह...

Panyas Shri Labdhivallabh Vijayji Maharaj Saheb
Jun 21, 20205 min read


भक्ति की पात्रता विकसित करें
आन्तरिक सौंदर्य की चित्ताकर्षक मोहकता जिनके हर कदम पर अनावृत थी, जिनकी आत्मनिष्ठ अदा से घायल होते थे सब समझदार, वे हो जाते थे उनके पीछे...

Panyas Shri Labdhivallabh Vijayji Maharaj Saheb
May 17, 20204 min read
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