भारतीय परंपरा में ‘चरण-स्पर्श’ का इतना गहरा महत्व क्यों है? चाहे परमात्मा हों, सद्गुरु हों,या माता-पिता जैसे हमारे बुज़ुर्ग हों — सबके ‘चरण-स्पर्श’ का उल्लेख हमारे कल्चर में बार-बार आता है। दिवाली जैसे पर्वों पर माता-पिता के चरण स्पर्श कर उनके आशीर्वाद लेने की परंपरा होती है... अंजनशलाका जैसे मंगल विधानों में “अनंत गुरुपादुकेभ्यो नमः” के माध्यम से सद्गुरु के ‘चरण-वंदन’ की ही बात आती है... जब हम शत्रुंजय जाते हैं — पाँच चैत्यवंदन करते हैं, दादा आदिनाथ का चैत्यवंदन करते हैं, फ
भक्ति, पर्व और उत्सवों का त्रिवेणी संगम है श्रावण मास। रक्षाबंधन के इस त्यौहार की सबसे बड़ी विशेषता है श्रावणी-पूर्णिमा के दिन होना। आज के दिन चन्द्र अपनी श्रेष्ठ पूर्णता पर होता है। हां, आज के दिन बहन द्वारा भाई के हाथ पर बांधी गई रेशम की एक राखी भाई-बहन के संबंधों को अनन्त काल के लिए स्थापित कर देती है। भाई-बहन के स्नेह का बंधन रक्षाबंधन भी पूर्ण प्रभावी होता है। बहन अपने भाई के हाथ पर राखी बांध कर अपने प्रेम को प्रकट करती है, तो वहीं भाई अपनी बहन की रक्षा के लिए वचनबद्ध हो