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Join date: Jan 29, 2025

Posts (5)

May 20, 20262 min
खूब चली गोली... खूब चली लाठियां, फिर भी अडिग रहे बागमाल बांठिया
'आर्यावर्त की अखंडता, शासन की सर्वोपरिता’ महावीर के वंशजों की ये शपथ है, ये वीरों का पथ है। इस आर्यावर्त को परतंत्रता की जंजीरों से जकड़ने के लिए अंग्रेजों ने जब अपनी कपटवृत्ति का सहारा लिया तब इस देश के वीर सपूतों ने जेल की जंजीरों से, फांसी के फंदे से और गोलियों की बौछार से डरे बिना, डगमगाये बिना स्वतंत्रता के नए इतिहास को अंजाम देने लड़ते रहे… आगे बढ़ते रहे। 6 अक्टूबर 1924 को कोटा के एक प्रतिष्ठित जैन परिवार में आपका जन्म हुआ। आपके ताऊ कस्तूरमल बांठिया का समाज में सन्माननीय स्थान था, वे...

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Sep 24, 20252 min
कहानी कुरबानी की - 6
दलीचंद जैन की दिलचस्प कहानी जब स्वतंत्रता की लालसा अपनी चरम सीमा पर पहुँचती है, तब अवरोध, उपेक्षा और पीड़ा का कोई मोल नहीं रह जाता।...

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Jul 31, 20252 min
कहानी कुरबानी की - 4
जेल में आजादी की आग, जेल में महावीर का राग... जहाँ सहिष्णुता धरती के कण-कण में महकती है,जहाँ साहस हिमालय की ऊँचाइयों को छूता है,जहाँ...

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